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500 से अधिक आरटीआई आवेदनों से बदलाव की मुहिम: बैंक ऑफ इंडिया ने कमियां स्वीकार कर शुरू किए सुधार, आरबीएल बैंक ने भी उठाए ठोस कदम

दिव्यांगजनों के अधिकारों और सार्वजनिक संस्थानों में सुगम्यता सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत पैनेशिया डिसएबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स  द्वारा चलाए जा रहे अभियान के सकारात्मक परिणाम अब बैंकिंग क्षेत्र में भी सामने आने लगे हैं। अर्थ डायग्नोस्टिक्स के सीईओ तथा  पैनेशिया डिसएबिलिटी  संस्था के अध्यक्ष एवं दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता डॉ. अरविंदर सिंह के नेतृत्व में विभिन्न सरकारी विभागों, बैंकों और सार्वजनिक संस्थानों में अब तक 500 से अधिक सूचना का अधिकार आवेदन लगाए जा चुके हैं। डॉ. सिंह स्वयं दिव्यांगजन होने के साथ चिकित्सक, उद्यमी और विधि विशेषज्ञ हैं और राजस्थान सरकार द्वारा दिव्यांग अधिकारों के कार्य के लिए पुरुस्कृत है।   

बैंकिंग सेवाओं में दिव्यांगजनों की सुगम पहुंच को लेकर किए गए सूचना अधिकार अभियान में बैंक ऑफ इंडिया से प्राप्त जानकारी में कई शाखाओं में आवश्यक सुगम्यता सुविधाओं की कमी सामने आई। इनमें उचित रैम्प, व्हीलचेयर सुविधा, दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए स्पर्शनीय मार्ग तथा दिव्यांग-अनुकूल शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल थीं। बैंक ने इन कमियों को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कार्यवाही प्रारंभ की तथा संबंधित शाखाओं में वास्तुविदों द्वारा निरीक्षण करवाकर रैम्प एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं में सुधार की प्रक्रिया शुरू की।

डा सिंह का मानना है कि यह उदाहरण दर्शाता है कि सूचना का अधिकार केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यवस्था में सकारात्मक और व्यावहारिक परिवर्तन लाने का प्रभावी साधन भी बन सकता है।

इसी क्रम में आरबीएल बैंक की मधुबन शाखा, उदयपुर ने भी   पैनेशिया संस्था द्वारा  दिए गए सुझावों और लगातार संवाद के बाद दिव्यांगजनों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए। बैंक द्वारा जारी आभार एवं प्रशंसा पत्र में संस्था की पहल को स्वीकार करते हुए बताया गया कि उसके सुझावों और पत्राचार के बाद शाखा में सुरक्षा रेलिंग सहित आवश्यक सुगम्यता संबंधी सुधार किए गए।

डॉ. अरविंदर सिंह ने कहा कि संस्था का उद्देश्य किसी बैंक या विभाग की आलोचना करना नहीं, बल्कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की भावना के अनुरूप सम्मानजनक और व्यावहारिक सुगम्यता सुनिश्चित करवाना है।

पैनेशिया संस्था बैंकिंग के अतिरिक्त रेलवे, रोडवेज, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य सार्वजनिक संस्थानों में भी सूचना अधिकार, सुगम्यता निरीक्षण, प्रतिवेदन और कानूनी माध्यमों से लगातार कार्य कर रही है। दिव्यांग अधिकारों को संस्थागत सुधार से जोड़ने की दिशा में सक्रिय हैं।

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